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अमृतसर सामूहिक आत्महत्या मामला: रिटायर्ज DIG सहित 5 लोगों को 8 साल की कैद, डीआईजी ने केस कमजोर करने के बदले पीड़ित की पत्नी से किया था रेप

डेस्क: अदालत ने अमृतसर के एक ही परिवार के पांच लोगाें द्वारा सामूहिक आत्‍महत्‍या करने के ब‍हुचर्चित मामले में दोषी करार दिए गए छह लोगों की सजा का ऐलान कर दिया है। साल 2004 में हुए इस बहुचर्चित सामूहिक आत्महत्या मामले में अमृतसर की अदालत ने पूर्व डीआइजी कुलतार सिंह को आठ साल और मौजूदा डीएसपी हरदेव सिंह को चार साल कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा चार दोषियों को आठ-आठ साल कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है।

amritsar sucide case

2004 में हुई यह घटना पूरे देश में चर्चित हुई थी। इन लोगों पर परिवार के लोगों को ब्‍लैकमेल करने का आरोप था। बता दें कि रिश्‍तेदारों और पुलिस के दो अधिकारियों की ब्‍लैकमेलिंग से परेशान होकर अमृतसर के चौक मोनी क्षेच्‍ के रहनेवाले हरदीप सिंह ने अपनी मां, पत्‍नी, बेटे और बेटी के साथ आत्‍महत्‍या कर ली थी। हरदीप का पिता से संपत्ति को लेकर झगड़ा हो गया था और झगड़े के दौरान पिता सुंदर सिंह की जान चली गई। हरदीप इसके बाद चुपके से पिता के शव को ठिकाना लगा रहा था कि उसके ताऊ महिंदर की बहू सबरीन कौर ने देख लिया। इसके बाद ब्‍लैकमेलिंग का दौर शुरू हो गया। इसमें दो पुलिस वाले भी शामिल हो गए। इससे परेशान होकर हरदीप ने पूरे परिवार के साथ आत्‍महत्‍या कर ली।

न्यायाधीश संदीप सिंह बाजवा की अदालत ने पूर्व डीआइजी कुलतार सिंह को आठ साल और डीएसपी हरदेव सिंह को चार साल की कैद सुनाई। कुलतार पर 23000 रुपये और डीएसपी हरदेव सिंह पर 20000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट के मामले में आत्‍महत्‍या करने वाले परिवार के चार रिश्तेदारों महिंदर सिंह, उसकी बहू सबरीन कौर, बेटी परमिंदर कौर और दामाद पलविंदर पाल सिंह को आठ-आठ साल कैद की सजा सुनाई है।

​​​​​मामले के अनुसार, हरदीप का अपने पिता सुंदर सिंह से विवाद चल रहा था। 11 अगस्‍त 2004 को उसका पिता से झगड़ा हो गया। इस दौरान हरदीप के हाथों सुंदर सिं‍ह की मौत हो गई। इसके बाद वह शव को ठिकाने लगा रहा था तो ताऊ महिंदर सिंह की बहू सबरीन कौर ने देख लिया।

इसके बाद महिंदर सिंह, सबरीन कौर, महिंदर की बेटी परमिंदर कौर और परमिंदर का पति पलविंदर पाल सिंह ने ब्‍लैकमेलिंग शुरू कर दी। इन लोगों ने हरदीप को पकड़वाने की धमकी देकर करीब सात लाख रुपये ले लिये। इसके बाद हरदेव ने इस ब्‍लैकमेलिंग से छुटकारा दिलाने की बा‍त कहकर तत्‍कालीन एसएसपी कुलतार सिंह से मिलवाया। कुलतार सिंह बाद में डीआइजी के पद से रिटायर हुआ।

पिता की माैत के मामले में हरदीप के खिलाफ कमजोर केस दर्ज करने की बात कह कर उससे पांच लाख रुपये ले लिये। इसके बाद कुलतार की मांग बढ़ गई व उसने हरदीप से सात लाख रुपये और देने को कहा। इसके साथ ही आरोप है कि कुलतार ने हरदीप की पत्‍नी को बुलाकर उससे दफ्तर में दुष्‍कर्म भी किया। उसने हरदीप को धमका कर उसकी पत्‍नी को चंडीगढ़ भी ले गया और वहां एक गेस्‍ट हाऊस में उससे दुष्‍कर्म किया और उसने 30 अक्‍टूबर की रात में परिवार के चार सदस्‍यों के साथ सामूहिक आत्‍महत्‍या कर ली। उसने खाने में जहर मिलाकर अपने बेटे इमरत और बेटी सनमीत को दे दिया। फिर मां जसवंत कौर को जहरीला खाना परोसा। इसके बाद पत्‍नी रोमी ने पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। अंत में हरदीप ने भी अपनी जान दे दी।

हरदीप सिंह ने दीवारों पर सुसाइड नोट लिखे और तीन अलग से सुसाइड नोट लिखे। हरदीप ने दीवार पर सुसाइड नोट में सभी आरोपिताें के नाम लिख दिए। आत्‍महत्या के बाद पुलिस टीम के साथ पहुंचे तत्‍कालीन थाना प्रभारी इंस्‍पेक्‍टर हरदेव सिंह ने दीवार पर लिखे सुसाइड नोट को मिटाने की कोशिश की, लेकिन मीडियाकर्मियों व लोगाें के पहुंचने के कारण वह कामयाब नहीं हो सका।

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